अल नीनो के खतरे पर केंद्र सरकार अलर्ट, मौसम और फसलों की निगरानी के लिए बनाया व्यापक एक्शन प्लान

नई दिल्ली: अल नीनो के संभावित असर और मानसून पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। सरकार ने मौसम, कृषि और जल संसाधनों की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया है, ताकि किसी भी संभावित संकट से समय रहते निपटा जा सके।

क्राइसिस मैनेजमेंट और निगरानी समूह किए गए गठित

सरकार की ओर से संभावित जोखिमों से निपटने के लिए क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप का गठन किया गया है, जिसमें आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के साथ राज्यों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा मौसम और फसलों की स्थिति पर नजर रखने के लिए विशेष वेदर वॉच ग्रुप भी बनाए गए हैं, जो हर सप्ताह समीक्षा कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।

मानसून और कृषि पर लगातार रखी जा रही नजर

सरकारी स्तर पर मौसम, बुवाई की स्थिति, बीजों की उपलब्धता और जलाशयों में जल स्तर की नियमित निगरानी की जा रही है। केंद्र सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि मानसून की अनिश्चितता का सीधा असर किसानों और कृषि उत्पादन पर न पड़े।

240 से अधिक जिलों में लागू हुआ कंटीजेंसी प्लान

सूत्रों के अनुसार देश के 240 से अधिक जिलों में कंटीजेंसी प्लान लागू किया गया है। इन जिलों में संभावित सूखे या कम बारिश की स्थिति को देखते हुए पहले से ही तैयारियां तेज कर दी गई हैं। राष्ट्रीय बीज भंडार में अतिरिक्त स्टॉक रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

कृषि मंत्री ने राज्यों को दिए सख्त निर्देश

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकें कर राज्यों को जिला स्तर पर आकस्मिक योजनाएं तुरंत लागू करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम भारतीय मौसम विभाग और विश्व मौसम संगठन की उन आशंकाओं के बाद उठाया गया है, जिनमें मानसून पर अल नीनो के असर की संभावना जताई गई है।

एक्शन प्लान के तहत कई अहम कदम

सरकार के एक्शन प्लान में कई स्तरों पर तैयारियां शामिल हैं। सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों के बीजों का वितरण किया जा रहा है। इसके साथ ही फसल निगरानी समूह बनाए गए हैं जो खेतों की स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे।

यदि खरीफ की मुख्य फसल जैसे धान की बुवाई प्रभावित होती है, तो किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने की सलाह दी जाएगी। साथ ही मौसम में बदलाव से फसलों में कीट और रोगों के खतरे को देखते हुए पहले से ही दवाओं और नियंत्रण उपायों की व्यवस्था की गई है।

जल और मिट्टी संरक्षण पर भी जोर

सरकार ने ग्रामीण विकास एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि खेतों में जल संरक्षण और मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर उपाय किए जाएं। वहीं, जिन क्षेत्रों में जलाशयों और बांधों में पानी उपलब्ध है, वहां उसका उपयोग प्राथमिकता के आधार पर और संतुलित तरीके से किया जाएगा।

अल नीनो का भारत पर संभावित असर

विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो का असर वैश्विक मौसम पैटर्न पर पड़ता है, जिससे कहीं सूखा तो कहीं अत्यधिक बारिश की स्थिति बन सकती है। भारत में इसका सबसे बड़ा प्रभाव मानसून पर पड़ता है, जो कृषि और जल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कमजोर मानसून की स्थिति में फसल उत्पादन प्रभावित होने और जल संकट की आशंका बढ़ जाती है।

इन्हीं संभावित चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने यह व्यापक एक्शन प्लान तैयार किया है, ताकि मौसम और कृषि दोनों स्तरों पर स्थिति पर नियंत्रण रखा जा सके और किसी भी संकट का प्रभाव कम किया जा सके।

 

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